SAAMAR/CMAM कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
📅 02 जून, 2026 | 📍 सरायकेला-खरसावां
- गंभीर एवं तीव्र कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान पर जोर।
- सामुदायिक स्तर पर देखभाल एवं उपचार सुनिश्चित करने पर बल।
- पोषण, स्वच्छता, स्तनपान एवं नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर चर्चा।
- आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
आज दिनांक 02 जून, 2026 को जिला समाज कल्याण विभाग, सरायकेला-खरसावां एवं यूनिसेफ के संयुक्त सहयोग से ईचागढ़ परियोजना क्षेत्र में SAAMAR/CMAM (Community Management of Acute Malnutrition) कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में गंभीर एवं तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान, उचित परामर्श, सामुदायिक स्तर पर देखभाल तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य संस्थानों से समन्वय स्थापित कर प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना है।
प्रशिक्षण में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कुपोषण के लक्षण, बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी, पोषण स्तर के आकलन, गृह भ्रमण, परामर्श सेवाओं तथा रेफरल व्यवस्था के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
विशेष रूप से इस बात पर बल दिया गया कि गंभीर एवं तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान समय रहते करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं से जोड़ा जा सके।
क्यों है कुपोषण चिंता का विषय?
कुपोषण बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास को प्रभावित करता है। यदि समय पर पहचान और उचित उपचार नहीं किया जाए तो यह बच्चों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
रोकथाम एवं जागरूकता पर जोर
प्रतिभागियों को कुपोषण की रोकथाम के लिए संतुलित आहार, स्तनपान, पूरक आहार, स्वच्छता, टीकाकरण एवं नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व से अवगत कराया गया।
साथ ही परिवारों एवं समुदायों के बीच पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।
सामुदायिक सहभागिता की भूमिका
इस अवसर पर विभागीय पदाधिकारियों ने कहा कि SAAMAR/CMAM कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय आधारित सहभागिता के माध्यम से कुपोषण की समस्या का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं, सहियाओं, स्वास्थ्य कर्मियों एवं अन्य संबंधित हितधारकों की सक्रिय भूमिका इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समन्वित प्रयासों पर बल
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कुपोषण उन्मूलन की दिशा में सामूहिक प्रयास करने पर विशेष बल दिया गया।
प्रतिभागियों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सेवाओं से जोड़ने, परिवारों को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रेरित करने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।
जिला प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित कर्मियों से बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार लाने हेतु संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपील की, ताकि जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।
निष्कर्ष
SAAMAR/CMAM कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण कुपोषण की पहचान, रोकथाम एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सामुदायिक सहभागिता, विभागीय समन्वय एवं जन-जागरूकता के माध्यम से कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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